प्रयागराज, लखनऊ, नैमिषारण्य और बनारस की राउंड-ट्रिप यात्रा - भाग-2 से आगे ......
नैमिषारण्य में होटल
नैमिषारण्य का मुख्य तीर्थ स्थल है चक्रतीर्थ। मैंने जो होटल बुक किया था, वो यहाँ से एक किलोमीटर के अंदर था। होटल का नाम "जे पी इंटरनेशनल होटल नैमिषारण्य" था। लखनऊ में हमारे स्थान से होटल की दूरी लगभग 100 किमी मैप में दिख रही थी। दो घंटे में हम लोग होटल पहुँच गए। सामने की बिल्डिंग में रिसेप्शन और रेस्टॉरेंट था जबकि पीछे एक भवन, जिसका डिज़ाइन किसी स्कूल की तरह था, में कमरे थे। एक लंबा बरामदा और कक्षा की तरह कमरे। हमें भूतल और प्रथम तल पर कमरे दिखाए गए। हमने प्रथम तल को चुना क्योंकि वहां से सामने खुला स्पेस और गार्डन नज़र आता था। कमरा भी साफ-सुथरा और वाशरूम भी सही थे। पहले हमने चाय मंगाई,फिर कमरे में ही रात का खाना मँगा कर सो गए।
चक्रतीर्थ
यहाँ ड्राइवर के लिए सोने की जगह थी। सबेरे उसे कॉल कर तैयार होने बोला, फिर हमलोग भी तैयार हो कर नीचे आए। देखा कि पार्किंग की जगह दो तीन ऑटो वाले जमा थे। हमें देखकर सभी तीर्थ दिखाने की बात करने लगे। हमने कहा कि अपनी गाड़ी से जायेंगे, उन्होंने कहा कि आपको सब जगह नहीं मालूम होगी, ऊपर से पार्किंग का झंझट होगा। हम उनकी बातों में नहीं आए और अपनी गाड़ी से ही निकले। पहला पड़ाव था चक्रतीर्थ जहाँ मैप देखते हुए पहुंचे।
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| नैमिषारण्य में चक्रतीर्थ स्नान |
चक्रतीर्थ का पौराणिक महत्व यह है कि ऋषियों की प्रार्थना पर भगवान् ब्रह्मा ने अपना मनोमाया चक्र धरती पर छोड़ा। जहाँ पर यह रुका वहाँ पर जल का एक कुंड बना। यह कुण्ड कलियुग के प्रभाव से अछूता होता है। ऋषियों ने अपनी साधना के लिए इस स्थान को चुना। 88000 ऋषियों ने यहाँ ध्यान और तप किया तथा पुराणों की रचना की। चक्र की तरह गोल इस कुंड में भक्तजन स्नान करते हुए परिक्रमा करते हैं। इससे नवग्रह की पीड़ा दूर होती है। एक अन्य कथा के अनुसार जब वृत्रासुर के वध के लिए ऋषि दधीचि की हड्डियों से वज्र बनाना आवश्यक हो गया तो उनकी खोज के लिए इन्द्रादि देवता विष्णु से मदद मांगने पहुंचे। विष्णु ने अपना सुदर्शन चक्र पृथ्वी पर भेजा और कहा जहाँ पर यह चक्र रुकेगा, वहीं ऋषि दधीचि मिलेंगे। सुदर्शन चक्र यहीं पर रुका, और दधीचि ऋषि भी पास ही मिले।
जब हम लोग यहाँ पहुंचे, तो एक व्यक्ति ने बताया, 'आगे गाड़ी पार्क कर दो और अंदर जाओ। हम लोग एक झोले में पहनने का कपड़ा ले कर चक्र तीर्थ कुंड के पास पहुंचे। वहाँ चौकियों पर कई पंडित जी बैठे थे। उन्हीं में से एक के पास गए। उन्होंने संक्षेप में कथा सुनाई, संकल्प करवाया और चक्रतीर्थ में एक या दो बार स्नान करते हुए परिक्रमा करने बोला। हम लोग स्नान के लिए उतरे। कुंड के चारों ओर घेरा बना हुआ है। इस घेरे में चक्र के आकार के अनेक सीमेंट वाले ग्रिल लगे हैं। घेरे के बाहर ही स्नान करते हुए परिक्रमा की जाती है। पानी लगभग छाती तक रहता है। पानी के अंदर परिक्रमा पथ और इसमें उतरने के लिए सीढ़ी सब पक्के हैं। किन्तु फिसलन बहुत थी। सावधानी पूर्वक रेलिंग पकड़ कर स्नान के लिए उतरे। पानी मेरे छाती तक था तो स्नान करते हुए मैं चल सकता था किन्तु कद थोड़ा काम होने के कारण पत्नी को पानी का स्तर लगभग गले तक आ रहा था। इसके कारण उनका पांव फर्श पर टिक नहीं पा रहा था। मैंने उन्हें खींच कर कुंड के रेलिंग में लगे सीमेंट वाले ग्रिल को पकड़वाया, तब जा कर वे रेलिंग पकड़ते हुए परिक्रमा कर पायीं।
परिक्रमा पूरी कर हम लोग ऊपर आए, कपड़े बदले और पंडित जी की दक्षिणा इत्यादि दी। गीले कपड़े झोले में कर उन्हीं की चौकी पर छोड़े और कुंड के चारों तरफ बने मंदिरों में दर्शन किए। यहाँ हर जगह मंदिरों में आपसे दान की आशा की जाती है। यहाँ से दर्शन -पूजन पूरा कर पंडित जी से विदा ले हम लोग आगे व्यास गद्दी की तरफ चले जो यहाँ से एक किमी दूर होगा।
व्यास गद्दी
व्यास गद्दी जब पहुंचे तो भक्त जन अभी आने शुरू नहीं हुए थे। सभी मंदिर खाली ही थे। यहाँ यू पी टूरिज्म द्वारा एक बोर्ड पर इस तरह लिखा हुआ है :-
मनु शतरूपा ब्रह्मा
स्वयम्भुव मनु अरु शतरूपा।
जिनते भई नर सृष्टि अनूपा।|
मान्यता है कि नैमिष की पावन धरा पर सृष्टि का सृजन हुआ। पृथ्वी के आधार (धुरी) नैमिष में प्रथम स्त्री-पुरुष से मनुष्य सृष्टि की उत्पत्ति हुई। इस पावन स्थली में मनु-शतरूपा ने तपस्या करके जीवन का आरम्भ ही नहीं किया, वरन निराकार ब्रह्म को साकार करके मानव जाति के लिए सुलभ करते हुए सर्वश्रेष्ठ मनुष्य जीवन जीने के लिए बाध्य कर दिया।
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| नैमिषारण्य में व्यास गद्दी प्रवेश द्वार |
यहाँ कई मंदिर हैं जिनमें व्यास गद्दी प्रमुख हैं जहाँ वेद-व्यास ने कई पुराणों की रचना की। इनमें श्रीमद्भागवत महापुराण और सत्यनारायण व्रत कथा प्रमुख हैं। एक बड़ा सा बरगद का वृक्ष है जो अति पुरातन एवं पवित्र मन जाता है। एक यज्ञ शाला, भगवत कथा हॉल, सत्यनाराण मंदिर, मनु-शतरूपा मंदिर, गोवर्धन मंदिर एवं माता कनक सुंदरी मंदिर है। हर स्थान पर दर्शन कर हम लोग आगे गोमती के राजघाट पर गए।
राजघाट, गोमती नदी
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| नैमिषारण्य में गोमती राजघाट |
कई लोग यहाँ भी स्नान कर रहे थे। मैंने यहाँ भी कई डुबकियाँ लगाकर स्नान किया और कुछ समय इस शांतिमय वातावरण में बिताया। अगला पड़ाव था हनुमान गढ़ी।
हनुमानगढ़ी
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| नैमिषारण्य के हनुमानगढ़ी का प्रवेश द्वार |
यहाँ गाड़ी खड़ी कर हमलोग हनुमान गढ़ी की तरफ प्रवेश ही करते कि यहाँ बना एक "श्रीकृष्ण, पांच पांडव और द्रौपदी" के मंदिर के पुजारियों ने कहा पहले यहाँ दर्शन होगा। वहां से दान-दर्शन के बाद हम लोग हनुमानगढ़ी मंदिर में गए। यह एक प्राचीन मंदिर है जो हनुमानजी की पाताल यात्रा से सम्बंधित है। जब अहिरावण ने राम-लक्ष्मण को पाताललोक में बंदी बना लिया था तब हनुमानजी ने अपने बल-बुद्धि से अहिरावण को मारकर, राम-लक्ष्मण को ले कर वापस आये थे। पंडित जी ने बताया कि यह मूर्ति स्वयं प्रकट हुई है। दर्शन पूजन के बाद पंडित जी की अनुमति से एक फोटो लिया। मंदिर से निकलते कुछ और जगह भी देव मूर्तियां हैं जहाँ से दर्शन कर मंदिर से नीचे उतरे। सीढ़ियों के पास एक हवन कुंड बना है जहाँ पुजारी पांच बार हवन में आहुति डालने कहते हैं। जब पार्किंग के पास आए तो एक सुन्दर तालाब के बीच में शिव-परिवार की मूर्ति देखी जहाँ शिव-जटा से पानी का फव्वारा निकल रहा था। पास ही एक खाटू श्याम मंदिर का मंदिर था जहाँ हमने अंदर जा कर दर्शन किये।
माँ श्री ललिता देवी शक्ति पीठ
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| नैमिषारण्य में माँ श्री ललिता देवी शक्तिपीठ |
वहाँ से निकलकर अब हम लोग यहाँ के एक प्रमुख मंदिर गए, जो कि एक शक्तिपीठ है। यहाँ है माँ श्री ललिता देवी शक्तिपीठ मंदिर। मान्यता है कि यहाँ पर सती माता का हृदय गिरा था। मंदिर के बाहर सड़क पर गाड़ी खड़ी कर आगे बढ़े। पूजा और प्रसाद वाली दुकानों की कतारें थीं। कुछ फूल-प्रसाद लेकर हम लोग भी अंदर गए और दर्शन पूजन कर निकले। मंदिरों में पूजा करने के कारण अब तक हमने कुछ खाया नहीं था। बहार सड़क पर ड्राइवर एक दुकान में चाय पी रहा था तो हमने भी चाय पी, पर अच्छा न था। अब हमने भोजन ही करने का सोचा।
रुद्रावर्त
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| रुद्रावर्त कुंड,नैमिषारण्य |
हमारा होटल यहाँ से पास ही था और उसका रेस्टॉरेंट 'मद्रास कैफे' बढ़िया था। तो हम लोगों ने वहीं जाकर भोजन किया। मुख्य-मुख्य मंदिर हमलोग जा चुके थे। एक अन्य दर्शनीय स्थान था रुद्रावर्त जो यहाँ से दस किमी दूर था। वहीं के लिए निकले। कुछ दूर तो अच्छी पक्की सड़क थी पर आगे ग्रामीण सड़क एक गांव और आगे खेतों से हो कर जाती थी। अंततः हम लोग रुद्रावर्त पहुँचे जो गोमती के ही किनारे है। यहाँ की विशेषता एक कुंड है जो गोमती नदी के किनारे ही बना है। इसके नीचे पानी में शिवलिंग है और मान्यता है कि कुंड में उन्हें यदि पांच फल समर्पित किया जाये तो कुछ फल स्वीकार कर महादेव बाकी फल प्रसाद के रूप में पानी के ऊपर भेज देते हैं। पास में कई दुकानदार पाँच फलों के पैकेट बेच रहे थे। हमने भी एक पैकेट लेकर कुंड में समर्पित किये जिनमें कुछ ऊपर आए, दो फल किसी तरह ले सके, एक धार में बह गया। कुंड के ऊपर एक नंदी प्रतिमा को प्रणाम कर हम लोग होटल लौटे।
साढ़े ग्यारह बजने वाले थे। चेक आउट कर हम लोग गाड़ी से बनारस के लिए निकले।
(बनारस यात्रा का विवरण पढ़ें अगले ब्लॉग - "प्रयागराज, लखनऊ, नैमिषारण्य और बनारस की राउंड-ट्रिप यात्रा - भाग-4 में" )
इस ब्लॉग के पोस्टों की सूची
33. Rajrappa Waterfalls, Ramgarh, Jharkhand
32. Khutta Baba Mandir and the Tenughat Dam
31. Maya Tungri Mandir - The Mahamaya Temple, Ramgarh, Jharkhand
30. Toti Jharna, Tuti Jharna Temple at Ramgarh, Jharkhand
29. ISKCON Temple and The Birla Temple at Kolkata
28. Belur Math, Howrah






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